अम्बाला : आंतरिक सौन्दर्य की अपेक्षा बाहरी सौन्दर्य की लालसा ही जीव के दुखों का कारण 

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  • आंतरिक सौन्दर्य की अपेक्षा बाहरी सौन्दर्य की लालसा ही जीव के दुखों का कारण 
  • स्वामी कमलानंद गिरी महाराज से शिव पार्वती विवाह सुनकर श्रोता हुए गदगद

राजेन्द्र भारद्वाज। अम्बाला


आज का इंसान बाहर के श्रृंगार को देखता है, अंदर के सत्य को पहचान नहीं पाता इसीलिए व्यथित और परेशान रहता है। यह सद्विचार महामण्डलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरी महाराज ने नावल्टी रोड़ अम्बाला शहर में स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में चल रही कथा में अपार जन समूह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने आज की कथा का आरम्भ करते हुए कहा कि हिमाचल के घर जब भोलेनाथ की बरात गई तो वहां के लोगों की सोच थी कि शंकर जी बहुत सुंदर श्रृंगार करके सुंदर सवारी पर आएंगे। परन्तु बैल की सवारी में बाघाम्बर धारण किए, खप्पर की माला पहने, सर्प का जनेऊ एवं शरीर में भस्मी मल कर भूत प्रेतों के साथ आए भोलेनाथ को देखकर समस्त हिमाचल वासी घबरा गए। पार्वती जी की माता मैंना आरती का थाल एवं जल का कलश और  जलती हुई ज्योति लेकर जैसे ही उनका स्वागत और  पूजा करने आई तो भोले बाबा का स्वरूप देखकर माता मैना एकदम घबरा गई। उनकी थाली का दीपक बुझ गया, क्लश नीचे गिर गया। माता मैना को भ्रम था कि मेरी इतनी सुंदर बेटी पार्वती का ऐसे वर जिसका वाहन बैल है, जिसका श्रृंगार अपशकुन से भरा है के साथ कन्यादान कैसे करूंगी! तो नारद जी ने मैना माता का सारा भ्रम दूर कर दिया। जैसे ही नारद जी ने ज्ञान दिया माता मैना और हिमाचल खुशी के मारे नृत्य करने लगे।
सुंदर श्रृंगार करके सखियों के साथ जब पार्वती जी विवाह मंडप में लाई गई तो देवताओं ने अपने वाद्ययंत्र बजाकर  पुष्प वर्षा करते हुए जगतमाता को प्रणाम किया। विधि पूर्वक विवाह की प्रक्रिया पूरी हुई। हिमाचल जी ने कुशा हाथ में लेकर कन्यादान किया और जैसे ही पार्वती जी का हाथ शंकर जी के हाथ में दिया सारी सभा में जय जयकार होने लगी सभी गौरीशंकर की जय जय कार करने लगे।
स्वामी कमलानंद गिरी जी महाराज ने भक्तजनों को गौरी शंकर के विवाह का प्रसंग सुनाकर भाव विभोर कर दिया। मंदिर का प्रांगण भक्तजनों के जयकारों  से गूंज उठा। कथा के बाद भक्त जनों की ओर से भगवान की आरती हुई एवंं प्रसाद वितरण किया गया।
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