फरीदाबाद : महाभारतकालीन मंदिर में बरसात से दोबारा लौटकर आया झरने का स्वरूप

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विकास ओहल्याण। फरीदाबाद


फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा गांव मोहबताबाद इन दिनों काफी चर्चाओं में है। बता दें की गांव के झरने वाले मंदिर में एक झरना है जिसका स्वरुप इस बरसाती दिनों में दोबारा लौट आया है। जिसे देखने के लिए लोग दूर दराज से आ रहे हैं। इतना ही नहीं इस मंदिर का भी इतिहास महाभारत काल और श्रवण काल से जुड़ा हुआ है। यहां के पुजारी और ग्रामीणों ने बताया कि यह मंदिर हजारों वर्षों से ऋषि मुनियों की तपो स्थली रहा है। दिखाई दे रहा यह वही झरना है जो इन दिनों काफी चर्चाओं में है और लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बता दें की यह झरना फरीदाबाद की अरावली की गोद में बसे गांव मोहबताबाद में स्थित एक प्राचीन मंदिर में गिर रहा है। जहां लोग इस झरने को देखने के लिए दूर दराज से आ रहे और यहां आकर झरने के निचे नहा कर मौज मस्ती भी कर रहे है। यह झरना यह मंदिर लोगों के लिए सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है। यहां के पुजारी और ग्रामीणों ने इस मंदिर और इस झरने के बारे में बताते हुए कहा कि यह मंदिर काफी प्राचीन है और तभी से यह झरना बह रहा है। लेकिन ग्रामीण लखमी चन्द ने बताया की पहले यह झरना बारहों महीने गिरता था लेकिन अरावली में हुए अवैध खनन और कम हो रही बरसात के चलते यह झरना अब केवल बरसाती मौसम में ही बहता है । वहीं उनके मुताबिक़ यहाँ पर ऋषि मुनी तपस्या किया करते थे यहॉं श्रवण कुमार भी आकर रुके थे और महाभारत काल में पांडव भी आये थे जिनके तप से यहाँ यह झरना बहने लगा था और यहॉं उन्हीं के द्वारा सात कुण्ड बनाये गए थे फिलहाल काफी गहरे होने के चलते उन सभी कुंडों को बन्द कर दिया गया है और एक कृत्रिम कुण्ड बनाया गया है आइये सुनाते है क्या कहना है ग्रामीणों और यहां के पुजारी का।

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