बाबैन : भाजपा के मंत्री और विधायक बताएं पिछले सात साल में गन्ने का कितना भाव बढ़ाया : मेवा सिंह

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  • भाजपा के मंत्री और विधायक बताएं पिछले सात साल में गन्ने का कितना भाव बढ़ाया : मेवा सिंह

रवि कुमार। बाबैन


लाडवा से कांग्रेस के विधायक मेवा सिंह ने भाजपा सरकार की ओर से गेंहू के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 40 रुपए और गन्ने में 12 रुपए की बढ़ौतरी किए जाने को अन्नदाता किसान के साथ भद्दा मजाक करार दिया है। उन्होंने वर्तमान सरकार को पूरी तरह किसान विरोधी बताते हुए कहा कि भाजपा देश-प्रदेश से खेती और किसान को खत्म करने पर तुली है। विधायक मेवा सिंह बाबैन में मार्किट कमेटी के पूर्व चेयरमैन हरिकेश सैनी के कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। मेवा सिंह ने कहा कि वर्ष 2011 के बाद से अब तक के दस साल के आंकड़ों पर गौर करें तो यह सरकार की ओर से गेंहू पर बढ़ाया गया सबसे कम न्यूनतम समर्थन मूल्य है। इससे पहले हमेशा यह बढ़ोतरी 80 से लेकर 125 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य की रही है। वहीं गन्ने के भाव में भाजपा सरकार ने पिछले सात साल में मात्र 52 रूपए की बढ़ोतरी की है। मेवा सिंह ने कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, विधायक और पूर्व विधायक सारे नेता एक बात का श्रेय लेने पर लगे हुए हैं कि प्रदेश सरकार ने गन्ने का भाव सबसे ज्यादा दिया है। वे भाजपा के नेताओं से पूछना चाहते है कि इन्होंने सात साल में गन्ने का कितना भाव बढ़ाया। मेवा सिंह ने कहा कि जब प्रदेश में 2004 में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्ड थे गन्ने का भाव 117 रूपए गन्ने का भाव था 2014 तक गन्ने का भाव 310 रूपए किया था पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने दस साल के कार्याकाल के दौरान 193 रूपए गन्ने का भाव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता गन्ने का सबसे ज्यादा भाव देने का ढिढोरा पीट रहे है भाजपा के नेता बताए की सात साल कितना गन्ने का भाव कितना बढाया है। उन्होंने स्वामीनाथन के सी-2 नियम का जिक्र करते हुए कहा कि इसके अनुसार किसान को फसल की लागत पर 50 प्रतिशत लाभाकरी मुल्य मिलना चाहिए। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा इस समय गेंहू पर किसान की लागत 1930 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। जबकि सी-2 नियम के अनुसार 50 प्रतिशत लाभाकारी मुल्य के साथ यह 2895 रूपए प्रति क्विंटल होना चाहिए। मेवा सिंह ने सी-2 नियम बारे बताया कि इसके तहत किसान को अपनी जमीन का ठेका मिलना चाहिए। किसान को मजदूरी मिलनी चाहिए। फसल की नीराई-गुढाई व बुहाई से लेकर खाद-बीज, पानी व दवाई, कटाई-कढ़ाई व फसल तैयार होने उपरांत उसे मंडी में ले जाने तका का खर्चा सरकार से किसान को मिलना चाहिए। मेवा सिंह ने कहा कि 28 फरवरी 2016 को स्वयं पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि था कि भाजपा सरकार बनने पर किसान की आमदनी दोगुनी करेंगे। उस समय गेंहू का मुल्य 1550 रूपए था। पीएम नरेन्द्र मोदी किसानों से किए अपने वायदे पर खरे उतरते तो आज गेंहू का न्यूनतम समर्थन मुल्य 3050 रूपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था। रही सही कसर भाजपा सरकार ने किसानों पर तीन काले कृषि कानून थोप कर पूरी कर दी है। भविष्य में जब भी किसानों के इतिहास का जिक्र आएगा, वर्तमान भाजपा सरकार का कार्यकाल उसमें अन्नदाता के लिए काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा। इस मौके पर मार्किट कमेटी के पूर्व चेयरमैन हरिकेश सैनी, पूर्व ब्लाक प्रधान राकेश अग्रवाल, पूर्व ब्लाक प्रधान जयपाल पांचाल, संजीव भूखड़ी, मोहनलाल चुघ, धर्मबीर रामशरण माजरा, प्रवीन सिंगला व अन्य कांग्रेसी कार्यकत्र्ता मौजूद रहे।

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