धार्मिक :: 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र, रखें ये सावधानियां

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हरप्रकाश पांडे


इस वर्ष चैत्र नवरात्र का महापर्व 6 अप्रैल 2019 से शुरू हो रहे हैं। नवमी तिथि 14 अप्रैल को है। इन नौ दिनों मां नौ रुपों की पूजा की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना अच्छा रहता है। यूं तो साल में दो बार नवरात्र आते हैं लेकिन दोनों ही नवरात्र का महत्व और पूजा विधि अलग है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र का महापर्व 6 अप्रैल 2019 से शुरू हो रहे हैं। नवमी तिथि 14 अप्रैल को है। इन नौ दिनों मां नौ रुपों की पूजा की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना अच्छा रहता है। यूं तो साल में दो बार नवरात्र आते हैं लेकिन दोनों ही नवरात्र का महत्व और पूजा विधि अलग है। इस बार कहा जा रहा है कि पांच सर्वार्थ सिद्धि, दो रवि योग और रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। इस बार यह भी कहा जा रहा है कि इस बार नवमी भी दो दिन मनेगी।

घट स्थापना मुहूर्त- इस साल 6 अप्रैल 2019 (शनिवार) से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार घटस्थापना के लिए देवी पुराण के अनुसार प्रातःकाल का समय ही श्रेष्ठ बताया गया है इसलिए सुबह द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करनी चाहिए।

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन उज्जैन के समयानुसार सुबह शुभ के चौघड़िया में 7 बजकर 251 मिनट से 9 बजकर 24 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।

नवरात्रि पर शक्ति के साधक मां जगदंबे की कठिन तप साधना-आराधना करते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस पावन पर्व पर माता का पूजन करने से चारो पुरुषार्थ धर्म ,अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए शक्ति की साधना के उन महामंत्रों के बारे में जानते हैं, जिन्हें भक्ति-भाव और नियमपूर्वक करने पर माता की कृपा अवश्य मिलती है।

इस मंत्र से मिलेगी परीक्षा में सफलता-विद्यार्थी वर्ग और जिन लोंगो कि जन्म कुंडली में गोचर में राहु अशुभ हों उनकी दशा, अन्तर्दशा अथवा प्रत्यंतर दशा चल रही हो वै सभी ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः’ मंत्र पढ़ते हुए माता शक्ति कि पूजा अथवा जाप करें।

देवी के यह मंत्र दूर करेगा कर्ज की परेशानी- जीवन से कर्ज का मर्ज दूर करने के लिए नवरात्रि पर शक्ति की विशेष साधना करना न भूलें। इस पावन पर्व पर ‘या देवि सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।’ मंत्र का जप करें और इसी मंत्र से मां की पूजा करें। इन सबके अतिरिक्त यदि संभव हो तो कुंजिका स्तोत्र और देव्य अथर्वशीर्ष का पाठ भी करें। जिन्हें पूर्ण बिधि-बिधान आता है, वे भक्त अपने ही अनुसार मां की भक्ति करें। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना से निश्चित रूप से मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी।

इस मंत्र जप से शीघ्र होगा विवाह- जिन कुंवारी कन्याओं का विवाह तमाम प्रयासों के बावजूद न हो पा रहा हो, माता-पिता वर तलाशते हुए परेशान हो गए हों, वे इस पावन पर्व पर ‘ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्य धीश्वरी, नन्द गोप सुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः।’ मंत्र से जप एवं माता का पूजन करें। माता की कृपा से यथाशीघ्र ही उन्हें जीवनसाथी मिल जाएगा।

देवी का यह मन्त्र करेगा कलह/क्लेश को दूर – जिन जीवात्माओं के घर में कलह के चलते घर की ईंट से ईंट टकराती हो,उन्हें – ‘या देवि! सर्व भूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।’ मंत्र का जप और पूजन करना चाहिए। जगत जननी जगदंबा का यह उपाय आपके घर-परिवार कि अशांति दूर करेगा।

इस मंत्र से मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी – जिन लड़कों का विवाह तमाम प्रयासों के बाद भी न हो रहा हो, या फिर शादी में अक्सर अड़चन आ रही हो वे मनमुताबिक जीवनसाथी पाने के लिए इस दिव्य मंत्र – ‘पत्नी मनोरमां देहि, मनो वृत्तानु सारिणीम तारिणीम दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम।’ का जप और पूजन करें। माता की अवश्य कृपा होगी।

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा के नौ रूप हैं शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंधमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताया कि इन नौ रातों में तीन देवी पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ रुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। नवदुर्गा के नौ स्वरूप स्त्री के जीवनचक्र को दर्शाते है।

जन्म ग्रहण करती हुई कन्या “शैलपुत्री” स्वरूप है।
स्त्री का कौमार्य अवस्था तक “ब्रह्मचारिणी” का रूप है।
विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह “चंद्रघंटा” समान है।
नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह “कूष्मांडा” स्वरूप में है।
संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री “स्कन्दमाता” हो जाती है।
संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री “कात्यायनी” रूप है।
अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह “कालरात्रि” जैसी है।
संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने से “महागौरी” हो जाती है।
धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली “सिद्धिदात्री” हो जाती है।
चैत्र नवरात्रि के उपवास रखें ये सावधानियां- नवरात्र में आपको मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति के सामने लाल फूल रोज चढ़ाना चाहिए।

इन नौ दिनों न तो बाल कटवाने चाहिये और ना ही दाढ़ी मूंछ बनवानी चाहिये।

नवरात्रि में भोजन में नॉन वेज, प्याज, लहसुन नहीं खाना चाहिये।

नौ दिन तक नींबू को नहीं काटना चाहिये, यह बेहद अशुभ माना जाता है।

नौ दिन तक दोपहर में नहीं सोना चाहिये। इससे आपको फिर व्रत रखने का फल नहीं मिलता।

इन दिनों काले कपड़े नहीं पहनने चाहिये।

प्‍याज-लहुसन के अलावा अनाज और नमक का भी सेवन नहीं करना चाहिये।

नवरात्रि पर चमड़े से बनी हुए चीजें ना पहनें। इनमें से चमड़े की बेल्ट, बैग और जूते-चप्पल शामिल हैं।

जानिए इस चैत्र नवरात्रि में किस दिन करें कौनसे ग्रह की शान्ति —

यह हें नवरात्र में नवग्रह शांति की विधि:– यह है कि प्रतिपदा के दिन मंगल ग्रह की शांति करानी चाहिए।

द्वितीय के दिन राहु ग्रह की शान्ति करने संबन्धी कार्य करने चाहिए।

तृतीया के दिन बृहस्पति ग्रह की शान्ति कार्य करना चाहिए।

चतुर्थी के दिन व्यक्ति शनि शान्ति के उपाय कर स्वयं को शनि के अशुभ प्रभाव से बचा सकता है।

पंचमी के दिन बुध ग्रह,

षष्ठी के दिन केतु ,

सप्तमी के दिन शुक्र,

अष्टमी के दिन सूर्य,

एवं नवमी के दिन चन्द्रमा की शांति कार्य किए जाते है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि किसी भी ग्रह शांति की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कलश स्थापना और दुर्गा मां की पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद लाल वस्त्र पर नव ग्रह यंत्र बनावाया जाता है. इसके बाद नवग्रह बीज मंत्र से इसकी पूजा करें फिर नवग्रह शांति का संकल्प करें।

चैत्र प्रतिपदा के दिन मंगल ग्रह की शांति होती है इसलिए मंगल ग्रह की फिर से पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद पंचमुखी रूद्राक्ष, मूंगा अथवा लाल अकीक की माला से 108 मंगल बीज मंत्र का जप करना चाहिए. जप के बाद मंगल कवच एवं अष्टोत्तरशतनाम का पाठ करना चाहिए। राहू की शांति के लिए द्वितीया को राहु की पूजा के बाद राहू के बीज मंत्र का 108 बार जप करना, राहू के शुभ फलों में वृ्द्धि करता है।

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