पटियाला :: इस बार चैत्र नवरात्रि पर कई शुभ योग भी बन रहा है : बद्री प्रसाद शास्त्री

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सुधीर पाहुजा । पटियाला


शिव सेना हिंदुस्तान की शाखा श्री सनातन धर्म प्रचारक सेना के जिला अध्यक्ष पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि  शनिवार 6 अप्रैल से पहला नवरात्र मनाया जाएगा और पहले दिन मां दुर्गा की पहली शक्ति देवी शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाएगी. हिन्दू पंचांग (Hindu Panchang) के अनुसार चैत्र मास में साल का नया वर्ष होता है. चैत्र नवरात्रि इस बार 6 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगी. इन नौ दिनों मे मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है. इस बार चैत्र नवरात्रि पर कई शुभ योग भी बन रहा है. तो साल में दो बार नवरात्र आते हैं लेकिन दोनों ही नवरात्र का महत्व और पूजा विधि अलग-अलग है. इस बार यह भी कहा जा रहा है कि इस बार नवमी भी दो दिन मनेगी

6 अप्रैल के दिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच स्थापना करना बेहद शुभ होगा.

जानें किस-किस दिन होगी कौन सी देवी की पूजा

पहला नवरात्र- 6 अप्रैल, स्थापना व मां शैलपुत्री पूजा, मां ब्रह्मचारिणी पूजा

दूसरा नवरात्र- 7 अप्रैल, मां चंद्रघंटा पूजा

तीसरा नवरात्र- 8 अप्रैल, मां कुष्मांडा पूजा

चौथा नवरात्र- 9 अप्रैल, मां स्कंदमाता पूजा

पांचवां नवरात्र- 10 अप्रैल, सरस्वती आह्वाहन

छठा नवरात्र- 11 अप्रैल, मां कात्यायनी पूजा

सातवां नवरात्र- 12 अप्रैल, मां कालरात्रि पूजा

आठवां नवरात्र- 13 अप्रैल, दुर्गा अष्टमी

नवमी- 14 अप्रैल, मां महागौरी पूजा, महानवमी

कलश स्थापना के लिए सामग्री

चावल, सुपारी, रोली, जौ, सुगन्धित पुष्प, केसर, सिन्दूर, लौंग, इलायची, पान, सिंगार सामग्री, दूध, दही, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, यज्ञोपवीत, मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, धूप, दीप, फूल, स्वच्छ मिट्टी, थाली, जल, ताम्र कलश, रूई, नारियल आदि.

नवरात्रि पूजा विधि

मां दुर्गा का चित्र स्थापित करें एवं पूर्वमुखी होकर मां दुर्गा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं

फिर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर चावल के नौ कोष्ठक, नवग्रह एवं लाल वस्त्र पर गेहूं के सोलह कोष्ठक बनाएं

एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसके नीचे गेहूं अथवा चावल डाल कर रखें

राशि के अनुसार करें माता की पूजा

पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि अगर आप इन  नवरात्रि में माता को प्रसन्न करना चाहते हैं तो अपना राशि के अनुसार माता की पूजा करें। इससे आपको माता कि विशेष कृपा तो प्राप्त होगी साथ ही आपकी हर मुश्किल भी आसान होगी..

मेष राशि

इस राशि के लोगों को स्कंदमाता की विशेष उपासना करनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। स्कंदमाता करुणामयी है,जो वात्सलयता का भाव रखती है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के लोगों को महागौरी स्वरुप की उपासना से विशेष फल प्राप्त होते हैं। ललिता सह्स्त्र नाम का पाठ करें। जन कल्याण कारी है। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

मिथुन राशि

इस राशि के लोगों को देवी यंत्र स्थापित कर बर्हम चारिणी की उपासना करनी चाहिए साथ ही तारा कवच का पाठ रोज़ करें। मां बर्हम चारिणी ज्ञान प्रदाता और विद्या के अवरोध को दूर करती है।

कर्क राशि

कर्क राशि के लोगों को शैलपुत्री की पूजा उपासना करनी चाहिए। लक्ष्मी सह्स्र्त्रनाम का पाठ करें। भगवती कि वरद मुद्रा अभय दान प्रदान करती है।

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए मां कूष्मांडा की साधना विशेष फल करने वाली है। दुर्गा मंत्रो का जप करें। ऐसा माना जाता है कि देवी मां के हास्य मात्र से ही बर्हमांड की उत्पत्ती हुई थी। देवी बलि प्रिया है,अत:साधक को नवरात्र की चतुर्थी को आसुरी प्रवृत्ति यानी बराइयों का बलिदान देवी के चरणों में निवेदित करते है।

कन्या राशि

इस राशि के लोगों को मां बर्ह्मचारिणी का पूजन करना चाहिए। लक्ष्मी मंत्रो का सविधि जप करें। ज्ञान प्रदान करती हुई विद्या के मार्ग को अवरोधों को दूर करती है। विद्यार्थियों के लिए देवी की आराधना फलदाई है।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों को महागौरी की पूजा आराधना से विशेष फल प्राप्त होता है। काली चालीसा या संप्तशती के प्रथम चरित्र का पाठ करें। जन कल्याणकारी है। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

वृश्चिक राशि

इस राशि के लोगों को स्कंदमाता की उपासना श्रेष्ठ फल प्रदान करती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और किसी की बुराई ना करें। सच्चे मन से प्राथना करेंगे तो हर प्राब्लम का समाधान चुटकी में हो जाएगा ।

धनु राशि

इस राशि वाले मां चंद्रघटा की उपासना करें संबंधित मंत्रो को यथाविधि अनुष्ठान करें। घंटा प्रतीक है उस बर्हमनाद का, जो साधक के भय और विघ्नों को अपनी ध्वनि से समुल नष्ट करता है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए कालरात्रि की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। नवार्ण मंत्र का जप करें। अंधकार में भक्तों का का मार्ग दर्शन और प्राकृतिक प्रकोप अग्निकांड आदि का शमन करती है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए कालरात्रि की उपासना लाभदायक है। देवी कवच का पाठ करें। अंधकार में भक्तों का मार्गदर्शन और प्राकृतिक प्रकोप का शमन करती है।

मीन राशि

मीन राशि के लोगों के मां चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए। हरिद्र (हल्दी) की माला से यथासंभव बगलामुखी मंत्र का जप करें। घंटा उस बर्हमनाद का प्रतीक है जो साधक के भय एवं विघ्नों को अपनी ध्वनि से समुल नष्ट करता है।

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