चंडीगढ़ : गैर-राज्य सिविल सेवा कोटे से आईएएस चयन में केंद्रीय नियमों को अनदेखा कर रही हरियाणा सरकार

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  • गैर-राज्य सिविल सेवा कोटे से आईएएस चयन में केंद्रीय नियमों को अनदेखा कर रही हरियाणा सरकार
  • एडवोकेट ने केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय, यूपीएससी में आरटीआई दायर कर मांगी सूचना 

राजेन्द्र भारद्वाज। चंडीगढ़


हरियाणा लोक सेवा आयोग एचपीएससी द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस में चयन हेतु हरियाणा सरकार के योग्य ग्रुप -ए अर्थात क्लास वन अधिकारियों , जो नॉन-एचसीएस कोटे से हों, उनकी संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी में अनुसंशा हेतु शॉर्टलिस्टिंग लघुसूचियन हेतू लिखित परीक्षा का आयोजन करने सम्बन्धी कवायद जारी है।

इस विषय पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया 9 जून 2020 को हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार प्रदेश के गैर-एचसीएस कोटे से आईएएस में चयन हेतू योग्य राज्य सरकार के ग्रुप ए गज़ेटेड अधिकारियों, जो हालांकि हरियाणा सिविल, पुलिस एवं वन सेवा के न हों और न ही सरकारी बोर्डो और निगमों के अधिकारी हों। जिनकी न्यूनतम 8 वर्ष की सेवा पूर्ण हो चुकी हो एवं जो सेवा में बेदाग हों, उनकी स्क्रीनिंग हेतु एचपीएससी को लिखित परीक्षा लेने के लिए अधिकृत किया गया जो कुल रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर राज्य सरकार को भेजेगा जिसके बाद मुख्य सचिव कार्मिक विभाग द्वारा उन शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों के सम्बंधित विभागों से उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट एसीआर एवं सीआर डोसियर मंगवा कर उन्हें यूपीएसी संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा। ज्ञात रहे कि बीती 20 मार्च को भी इस विषय में हरियाणा सरकार में के एक आदेश जारी किया था जिसमे हालांकि उक्त चयन प्रक्रिया में यूपीएससी का सन्दर्भ तक नहीं था एवं सम्पूर्ण चयन का दायित्व एचपीएससी को ही दे दिया था। इस आदेश का हालांकि 9 जून को जारी नए आदेश से अधिक्रमण सुपरसीड कर दिया गया है।

बहरहाल हेमंत ने बताया कि चूँकि नॉन-एचसीएस कोटे से आईएएस बनाने की प्रक्रिया पर आरम्भ से ही प्रश्नचिन्ह उठते रहे है, इसलिए मौजूदा सरकार द्वारा लिखित परीक्षा के आधार पर राज्य सरकार के योग्य ग्रुप -ए अधिकारियों का नाम शॉर्टलिस्ट करने का निर्णय एक प्रशंसनीय कदम है हालांकि उनका कानूनी मत है इस सब के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर, 1997 में बनाये गए आईएएस चयन द्वारा नियुक्ति विनियम, 1997 जो 1 जनवरी 1998 से लागू हुए, उनके पूर्णतया अनुरूप ही उक्त आईएएस चयन प्रक्रिया होनी चाहिए एवं हरियाणा सरकार इन्हे अनदेखा कर कोई नया मापदंड लागू नहीं कर सकती है।

उन्होंने आगे बताया कि उक्त 1997 विनियमों के विनियम संख्या 3 में एक कमेटी के गठन का स्पष्ट उल्लेख है जिसकी संरचना आईएएस पदोनत्ति द्वारा नियुक्ति विनियमावली 1955 के लिए गठित कमेटी जैसी ही होगी। इस कमेटी में यूपीएसपी के चेयरमैन अथवा उनकी अनुपस्थिति में उस आयोग के कोई और सदस्य चेयरमैन होंगे जबकि अन्य सदस्यों में प्रदेश की मुख्य सचिव, मुख्य सचिव के बाद सबसे प्रदेश के सबसे वरिष्ठम आईएएस अधिकारी , प्रदेश के कार्मिक एवं सामान्य प्रशासन अथवा राजस्व विभाग के प्रमुख, जो प्रदेश सरकार में सचिव रैंक से नीचे का न हो एवं इनके अतिरिक्त भारत सरकार में तैनात दो जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी होंगे जो की प्रदेश के आईएएस कैडर से नहीं होंगे। लिखने योग्य है कि इस कमेटी के चेयरमैन के अलावा सभी अन्य सदस्य आईएएस होने चाहिए। हेमंत ने बताया की हो अत्यंत हैरान हैं कि 9 जून को हरियाणा सरकार के द्वारा जारी आदेश में उक्त कमेटी की चयन प्रक्रिया में कोई भूमिका भी नहीं दर्शायी गयी है। अब क्या यह भूलवश हुआ है या किसी और कारण से, यह जांच करने योग्य है।

इस विषय पर हेमंत ने 29 जून को केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय डीओपीटी, यूपीएससी, केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में अलग अलग ऑनलाइन याचिकाएं दायर हरियाणा में जारी नॉन-एससीएस कोटे से आईएएस की चयन प्रक्रिया सम्बन्घित कई आधिकारिक जानकारी देने की मांग की है।

हेमंत ने बताया कि पिछले लगभग 22 वर्ष में उक्त आईएएस चयन द्वारा नियुक्ति विनियमावली 1997 में केवल मार्च 2015 में एक बार ही संशोधन किया गया है जब केंद्र सरकार द्वारा योग्य गज़ेटेड अधिकारियों की अधिकतम आयु सीमा को सम्बंधित वर्ष में एक जनवरी को 54 वर्ष से कम में संशोधन कर 56 वर्ष से कम कर दिया गया था। ज्ञात रहे की इन विनियमों में राज्य सरकार कोई संशोधन नहीं कर सकती।

बहरहाल 1997 विनियमों के अनुसार हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश सेवा में कार्यरत योग्य गज़ेटेड अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट कर जो रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना होंगे उन्हें उक्त उल्लेखित कमेटी के विचार के लिए भेजे जाने चाहियें।अब चूँकि हरियाणा सरकार की और से यह कार्य एचपीएससी करेगा अर्थात 5 आईएएस की रिक्तियों के लिए अधिकतम 25 शॉर्टलिस्टेड अधिकारियों के नाम एचपीएससी राज्य सरकार को भेजेगा जिसके बाद सरकार को वह नाम इस कमेटी को विचार के लिए भेजने होंगे।

यह कमेटी उन अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड और इंटरव्यू के आधार पर उनके नामो पर विचार करेगी। इसका उल्लेख विनियम संख्या 5 में है। यह कमेटी उतने ही नामो को प्रदेश सरकार को अनुसंशा कर भेजेगी जितनी कि रिक्तियां है जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा वह नाम यूपीएससी को भेजे जाएंगे जिनके साथ उन अधिकारियों के गोपनीय रिकॉर्ड और राज्य सरकार और उक्त कमेटी के कमैंट्स होंगे। राज्य सरकार कमेटी की सिफारिशों को केंद्र को भी भेजेगी जिसके बाद इस सम्बन्ध में केंद्र भी अपनी कमेंट्स यूपीएससी को भेजेगा।

इसके बाद यूपीएससी उक्त प्राप्त सारे रिकॉर्ड पर विचार कर चयनित उमीदवारो की सूची बनाएगा जिसे सेलेक्ट लिस्ट कहा जाएगा। अगर यूपीएससी चाहे तो उक्त सेलेक्ट लिस्ट फाइनल करने से पहले केंद्र और सम्बंधित राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श कर उसमें बदलाव भी कर सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार उक्त सेलेक्ट लिस्ट में क्रमवार सम्मिलित अधिकारियों की 60 दिन के भीतर आईएएस में नियुक्ति कर सकती है हालांकि अगर केंद्र को ऐसा प्रतीत हो तो वह निर्धारित कारणों को रिकॉर्ड उन सेलेक्ट लिस्ट में सम्मिलित अधिकारियों की आईएएस में नियुक्ति से मना भी कर सकता है।

हेमंत ने उक्त चयन प्रक्रिया में दो-दो संवैधानिक लोक सेवा आयोगों के शामिल होने पर भी कानूनी प्रश्न उठाया है। उन्होंने बताया एचपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 में एक स्वतंत्र संस्था है एवं वह हरियाणा सरकार के अधीन नहीं है। इस प्रकार वह राज्य सरकार द्वारा दी गयी हर प्रकार की चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं है विशेष तौर पर जब विषय अखिल भारतीय सेवाओं अर्थात आईएएस के लिए चयन प्रक्रिया, चाहे उनकी अनुसंशा के लिए शॉर्टलिस्टिंग का हो, चूँकि आईएएस सेवा में चयन सम्पूर्णतया यूपीएससी के अधिकार-क्षेत्र में ही आता है।

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