चंडीगढ़ : हरियाणा में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओ का पांच वर्ष कार्यकाल अभी छः माह पड़ा है शेष

Share This
  • हरियाणा में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओ का पांच वर्ष कार्यकाल अभी छः माह पड़ा है शेष
  • पंचायतों के कार्यकाल बारे हरियाणा का ताज़ा संशोधन संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप नहीं : एडवोकेट हेमंत

राजेन्द्र भारद्वाज। चंडीगढ़


हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जिनके पास विकास एवं पंचायत विभाग भी है, ने कहा है कि अगले पंचायती आम चुनावो तक सरपंच-पंच सहित सभी प्रदेश की सभी मौजूदा पंचायतें अपना कार्य बिना किसी अवरोध के करती रहेंगी एवं वर्तमान कोरोना-वायरस संक्रमण के कारण उत्पन्न हुई परिस्थितियों के फलस्वरूप उक्त आम चुनाव जनवरी-फरवरी 2021 में करवाए जा सकते है।

बहरहाल, इस सम्बन्ध में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि चूँकि हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओ के पिछले आम चुनाव तीन चरणो में जनवरी, 2016 में करवाए गए थे इसलिए इन सब का पांच वर्ष का संवैधानिक गारंटीड कार्यकाल फरवरी-मार्च 2021 तक है अर्थात तत्कालीन निर्वाचित उक्त संस्थाओ द्वारा अपनी बुलाई गयी पहली बैठक से पांच वर्षो तक। इस प्रकार उन सब का अभी छः माह का कार्यकाल वैसे भी शेष बचा है बशर्ते उनमें से किसी पंचायती संस्था को समयपूर्व एवं कानूनन भंग न कर दिया जाए।

उन्होंने आगे बताया की प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओ के आम चुनाव करवाना राज्य सरकार अर्थात पंचायत विभाग का कार्य नहीं होता बल्कि संविधान में 73 वे संशोधन अधिनियम, 1992 जिसे 24 अप्रैल, 1993 से लागू किया गया एवं जिसके द्वारा नए डाले गए अनुच्छेद 243(के) अनुसार देश के हर राज्य की पंचायती राज संस्थानों अर्थात ग्राम पंचायतो , ब्लॉक अथवा पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनावो का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य चुनाव और निर्वाचन आयोग के पास होता है।

हालांकि हेमतं ने यह भी बताया कि आज से 16 वर्ष पूर्व तत्कालीन ओम प्रकाश चौटाला सरकार ने हरियाणा पंचायती राज कानून में संशोधन कर पंचायतो के पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के चार माह पूर्व उनके ताजा आम चुनाव करवाने के लिए प्रावधान किया था हालांकि उसमें यह भी है कि नव निर्वाचित प्रतिनिधियों के नाम पूर्व गठित पंचायती राज संस्थाओ के पांच वर्ष कार्यकाल पूर्ण होने से एक सप्ताह पहले ही अधिसूचित किये जा सकेंगे। हालांकि आज तक इस प्रावधान को अमल में नहीं लाया गया। अगर ऐसा होता भी है, तो अगले चुनाव आगामी अक्टूबर माह या उसके बाद ही करवाए जा सकते है चूँकि मौजूदा पंचायतें अपना पांच वर्ष का कार्यकाल फरवरी-मार्च 2021 तक पूर्ण करेंगी बशर्ते उन्हें समयपूर्व कानूनन भंग न कर दिया जाए।

हेमंत ने आगे बताया कि मार्च माह में हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अन्य विधेयकों के साथ साथ हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2020 भी पारित किया गया। इस संशोधन विधयेक द्वारा हरियाणा पंचायती राज अधिनियम,194 की अन्य धाराओं में संशोधन करने के साथ साथ इसकी मूल धारा 3(1) को भी पूर्णतया परिवर्तित कर किया गया है। सदन से पारित इस विधयेक को बीती 20 अप्रैल 2020 को हरियाणा के राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हो गयी एवं बीती 4 मई 2020 को हरियाणा के गजट में प्रकाशित होने के बाद यह विधिवत रूप से प्रदेश में कानून बन लागू हो भी गया है।

इस पर हेमंत ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (ई ) के अनुसार किसी भी निर्वाचित पंचायती राज संस्था अर्थात ग्राम पंचायत पंचायत एवं ब्लॉक समिति जिला परिषद् का कार्यकाल उसके निर्वाचन के बाद बुलाई गयी पहली बैठक से पांच वर्ष तक होता है बशर्ते वह समयपूर्व भंग न हो जाए। हरियाणा पंचायती राज कानून, 1994 की मूल धारा 3(1) में भी ऐसा ही उल्लेख था हालांकि इस वर्ष के संशोधित कानून द्वारा पंचायती राज संस्थाओ का कार्यकाल राज्य चुनाव आयोग द्वारा उक्त संस्थाओ के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्बन्ध में जारी होने वाली नोटिफिकेशन से पांच वर्ष कर दिया गया है। हेमंत ने बताया कि यह संशोधन हालांकि मौजूदा पंचायती राज संस्थाओ पर नहीं बल्कि अगले वर्ष के आरम्भ में होने वाले पंचायती आम चुनावों के पश्चात निर्वाचित पंचायती राज संस्थाओं पर लागू होगा।

उन्होंने प्रश्न उठाया है कि अब यह कानूनी तौर पर परखने लायक है की क्या भारतीय संविधान में किसी विषय पर स्पष्ट उल्लेख के बावजूद क्या कोई राज्य सरकार अपने प्रदेश की विधानसभा से कोई ऐसा कानून पारित करवा बना सकती है जो संवैधानिक प्रावधान के अनुकूल न हो ? उन्होंने बीते माह इस बारे में प्रदेश के राज्यपाल , मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री आदि को अलग अलग पत्र याचिकाएं भेजी हैं। राज्यपाल ने बीते माह उनकी याचिका हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को भेज दी है।

हालांकि हेमंत ने यह भी बताया कि हरियाणा पंचायती राज कानून में नव निर्वाचित ग्राम पंचायत की पहली बैठक आयोजित करने के सम्बन्ध में कोई समय सीमा का उल्लेख नहीं है जैसा कि पंचायत समिति एवं जिला परिषद् के निर्वाचन सम्बन्धी राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के चार सप्ताह अर्थात एक माह के भीतर उनके द्वारा पहली बैठक आयोजित करने आवश्यक हैं। इस पर अपना कानूनी मत देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार को चाहिए कि उपयुक्त संशोधन कानून द्वारा नई निर्वाचित ग्राम पंचायत की पहली बैठक बुलाने की समय सीमा भी चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की नोटिफिकेशन जारी होने के एक माह के भीतर करने सम्बन्धी प्रावधान कर दिया जाए।

Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *