चंडीगढ़ : क्या सैक्स करने से हो सकता हैं कोरोना-वायरस संक्रमण का खतरा ?

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  • क्या सैक्स करने से हो सकता हैं कोरोना-वायरस संक्रमण का खतरा ?
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के पास जवाब नहीं, आरटीआई द्वारा मांगी गयी थी जानकारी

राजेन्द्र भारद्वाज। चंडीगढ़


वैश्विक महामारी कोरोना-वायरस से दुनिया भर में अब तक संक्रमिक लोगों की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 1 करोड़ 71 लाख 6 हज़ार से ऊपर हो गयी है जबकि विश्व भर में इससे मरने वाले लोगों की संख्या 6 लाख 69 हज़ार हो गयी है और यह संख्या निरंतर हर घड़ी बढ़ती ही जा रही है। अकेले अमेरिका में है डेढ़ लाख से ऊपर लोगो की मौत हो चुकी है। विश्व के 216 देशों और क्षेत्रों आदि में कोविड -19 के संक्रमण फ़ैल चुका है।

भारत देश में भी कोरोना वायरस संक्रमण के दृष्टिगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चार माह पहले 25 मार्च 2020 से सर्वप्रथम 21 दिनों के लिए देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषित किया गया जिसे पहले 3 मई तक, उसके बाद 17 मई तक और फिर 31 मई तक बढ़ा दिया गया। हालांकि 1 जून से आज तक उक्त लॉकडाउन केवल विशेष तौर पर घोषित किये गए कन्टेनमेंट जोनो अर्थात जहाँ कोविड -19 के मामले पाए गए हैं और जहां यह अधिक हैं और तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं पर लागू किया जा रहा है जबकि शेष स्थानों और क्षेत्रों में इसे चरणबद्ध ढंग से लॉकडाउन को अनलॉक किया जा है परन्तु इसके साथ साथ ही हर व्यक्ति द्वारा अपने चेहरे पर उचित मास्क या फेस कवर पहनने , लोगो को आपस में सामाजिक दूरी बनाये रखने आदि की सख्त अनुपालना करने के सम्बन्ध में लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं।

हालांकि विडंबना यह है कि फिर भी हमारे देश में संक्रमित लोगो की संख्या बढ़ी है। आज 1 अगस्त 2020 की सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आकड़ो के अनुसार देश भर में कोविड -19 के अब तक कुल संक्रमित लोगो की संख्या 16 लाख 95 हज़ार 988 अर्थात 17 लाख हो मामले हो चुके है है जिनमे से 5 लाख 65 हज़ार 103 एक्टिव केस है जबकि 10 लाख 94 हज़ार 374 मरीज़ ठीक एवं डिस्चार्ज हो चुके हैं। परन्तु ठीक हुए कुछ लोगो में फिर से कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। देश में इस्सके मरने वालो की आधिकारिक संख्या अब तक 36 हज़ार 511 हो चुकी है जो हर दिन बढ़ रही है। बीते 24 घंटो में पूरे देश में 57,117 इसके नए मामले रिपोर्ट हुए हैं जबकि 764 लोगो की मौत हुई है।

इसी बीच एक रोचक परन्तु अति महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है की ऐसे में जब न केवल घरों के बाहर सोशल डिस्टैन्सिंग के सिद्धांतो अर्थात कम से कम दो गज की दूरी का पालन करने बल्कि घरो के भीतर भी परिवार वालो को एक दूसरे से उचित दूरी बनाये रखने का आह्वान जा रहा है तो क्या इस सबके बीच क्या आपसी शारीरिक सम्बन्धो अर्थात सेक्स, सहवास, सम्भोग आदि से भी परहेज़ रखना चाहिए ? इस बारे में हालांकि आज तक कोई आधिकारिक एवं स्पष्ट तौर पर भारत सरकार या स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा देशवासियों को कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

इस सबके दृष्टिगत शहर निवासी एवं हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने साढ़े तीन माह पूर्व बीते अप्रैल माह में प्रधानमंत्री कार्यालय , कैबिनेट सचिवालय , केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन कौंसिल फॉर मेडिकल रेसेरर्च आईसीएमआर में अलग अलग ऑनलाइन आरटीआई याचकाएं दायर कर इस सम्बन्ध में आधिकारिक सूचना देने की मांग की। उन्होंने अपनी याचिका में लिखा कि राष्टहित एवं सामाजिक हित में भारतीय गणतंत्र का एक नागरिक होने के नाते उन्होंने यह याचिका दायर की है जिसमे वह इस विषय में उपलब्ध आधिकारिक सूचना मांग रहे है की क्या मौजूदा कोविड -19 महामारी के दौरान सेक्स अर्थात आपसी शारीरिक सम्बन्धो आदि के कारण उक्त संक्रमण होने का जोखिम हो सकता है अथवा इसकी सम्भावना है। उन्होंने इस विषय पर भारत सरकार के पास विश्व स्वास्थ्य संगठन अथवा अन्य अंतर्राष्ट्रीय या राष्ट्रीय मेडिकल सस्थान एवं संगठन से प्राप्त किसी भी एडवाइजरी और प्रोटोकॉल आदि, अगर इस सम्बन्ध में प्राप्त हुआ है, इस पर भी जानकारी प्रदान करने की मांग की।

उन्होंने अपनी आरटीआई में यह भी लिखा है ऐसी जानकारी भारत सरकार द्वारा लोगो से सांझा वैसे भी अत्यंत आवश्यक हैं।हेमंत ने बताया कि गूगल एवं अन्य ऑनलाइन सर्च इंजनो पर इस विषय पर सटीक और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है जिस कारण लोगो के मन में भ्रम की स्थिति व्याप्त हो जाती है और संकोच एवं शर्म के कारण लोग खुले तौर पर इस बारे में सार्वजानिक पूछने से भी हिचकिचाते है और वैसे भी सामान्य डॉक्टरों, चिकित्सको, नर्सो, लैबोरेट्रीज एवं मेडिकल स्टोर एवं फार्मेसी, केमिस्ट आदि की पास भी कोई स्पष्ट या पुख्ता जानकारी नहीं हो सकती इसलिए भारत सरकार का यह दायित्व बनता है की वह इस सम्बन्ध में अगर उसके बाद इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है, तो वह उसे प्रदान करें एवं लोगो से सांझा करे।

हेमंत ने बताया कि दुर्भाग्यवश आज साढ़े तीन माह बीते जाने के बाद ही उन्हें अपनी आरटीआई के बारे में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय ने उनकी आरटीआई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को तत्काल ही स्थानांतरित कर दिया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अपने अधीन आने वाली लगभग सभी शाखाओं और कार्यालयों में उनकी आरटीआई को एक नहीं बल्कि कई बार ट्रांसफर किया गया है और उनमें से कुछ ने मंत्रालय को ही यह वापिस कर दी है या आगे किसी और शाखा को ट्रांसफर किया जा रहा है जिसका नतीजा यह हुआ है की इस कारण उनकी आरटीआई याचिकाओं की कुल संख्या बार बार स्थानांतरण होने के बाद 150 के करीब हो गयी परन्तु आज तक कोई स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हुआ जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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