रिपोर्ट में खुलासाः Moscow में विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले पैंगोंग उत्तरी तट पर चली थी 100-200 राउंड गोलियां

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हरियाणा न्यूज एक्सप्रैस। नई दिल्ली


भारत चीन सीमा विवाद के इतिहास में 40 वर्षों बाद एसा हुआ जब एलएससी पर 100 से 200 राउंड फायरिंग हुई। इस बात का खुलासा एक वरीष्ठ अधिकारी ने किया है। उन्होंने बताया कि गोलीबारी की पैंगोग झील के उत्तरी तट पर हुई थी। अधिकारी ने बताया की फिंगर तीन और फिंगर चार जहां पर मिलते हैं वहां पैंगोंग के उत्तरी तट पर हावी होने के लिए यह फायरिंग हुई थी। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के मॉस्को में 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयंशकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी की मुलाकात से पहले पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे के नजदीक दोनों सेनाओं में गोलीबारी हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि फायरिंग की घटनाएं उस दौरान हुईं, जब दोनों देशों की सेनाएं फिंगर इलाके में पकड़ मजबूत करने के लिए गश्त कर रही थीं। अब तक इस घटना के बारे में न तो चीन और न ही भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान दिया गया है। इससे पहले चुशूल सेक्टर में हुई फायरिंग की घटना पर दोनों देशों में तनातनी हुई थी। अधिकारी का कहना है कि ताजा फायरिंग चुशूल में हुई फायरिंग से भी ज्यादा भीषण थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि भारत और चीनी सेना के बीच एलएसी पर एक महीने में तीन बार फायरिंग की घटना हो चुकी है। अब तक सिर्फ चुशूल सेक्टर में हुई फायरिंग को लेकर ही दोनों देशों की ओर से आधिकारिक बयान आए हैं। अगस्त में मुकपरी में भी फायरिंग की घटना हुई थी, लेकिन उस बारे में कोई बयान नहीं आया। अब पेंगोंग के उत्तरी किनारे पर 100-200 राउंड फायर हुए हैं, मगर अब तक दोनों देशों में किसी ने भी कोई बयान नहीं दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने ये भी बताया कि पेंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फायरिंग कैसे शुरू हुई थी। सितंबर की शुरुआत में भारतीय सेना पेंगोंग सो के उत्तरी किनारे पर अपनी पोजिशन बदल रही थी। चीनी सेना इसी जगह पर महज 500 मीटर की दूरी पर है। इसी दौरान दोनों के बीच फायरिंग हुई।

अधिकारी ने कहा कि पहले एक छोटी घटना हुई, जिसके बारे में हमारे जवानों ने बताना जरूरी नहीं समझा। बाद में छोटी घटना बड़ी हो गई है और फिंगर 4 और फिंगर 3 पर कई राउंड फायरिंग हुई। हालांकि, 29-30 अगस्त को एलएसी पर ऊंची चोटियों पर पकड़ मजबूत करने के बाद भारत वहां अब चीन से ज्यादा फायदे वाली स्थिति में आ गया है।

हालांकि, मॉस्को में भारत-चीन के विदेश मंत्रियों और बाद में रक्षा मंत्रियों की बातचीत के बाद हालात कुछ काबू में होने की बात कही जा रही है। दोनों देशों के बीच आर्मी कमांडर लेवल पर बातचीत का दौर पर चल रहा है। अब देखना है कि इसमें क्या नतीजा निकलता है।

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