अम्बाला : किसान एकजुट न हुए तो फसलों के साथ नसलें भी हो जाएंगी बर्बाद : चित्रा सरवारा

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राजेन्द्र भारद्वाज। अम्बाला


हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने कहा है कि देश में मौजूदा हालात के चलते यदि किसान अपने हकों की लड़ाई के लिए एकजुट न हुए तो फसलों के साथ साथ नसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। चित्रा सरवारा ने कहा कि भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में किसानों से वायदा किया था कि चुनाव परिणाम आते ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर दी जाएगी और किसानों की आमदनी दौगुनी करने की व्यवस्था कर दी जाएगी। लेकिन 2019 के चुनाव से पूर्व तक किसानों की मांगों को माना नहीं गया और एक बार फिर झूठे वायदे करके किसानों को बरगला दिया और वोट हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि अपने हकों की लड़ाई लड़ते हुए पिपली पहुंचे किसानों पर बर्बतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया। वहां मौजूद बुर्जुगों और नौजवानों के हाथ पैर बेरहमी से तोड़े गए। इस अत्याचार के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह प्रदेश के गृह मंत्री ने यह कहकर किसानों का मजाब उड़ाया कि हरियाणा पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज नहीं किया तो फिर सादी वर्दी में जिन लोगों ने लाठीचार्ज किया उन्हें पुलिस ने क्यों नहीं पकड़ा ‌? उन्होंने कहा कि यहां चोटिल हुए किसानों की एमएलआर तो नहीं कटी लेकिन उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर जरूर कट गई। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के हालात यह है कि जीएसटी की मार के कारण किसानों के इस्तेमाल में आने वाली खाद, कीटनाशक दवाई और बीज इत्यदि महंगे हो चुके हैं जबकि किसानों की फसलों के दाम दिन प्रतिदिन गिरते जा रहे हैं। सरकार 3 अध्यादेश लाकर किसानों को चंद पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की साजिश रच रही है। फसल बीमा की आड़ में किसानों के साथ अबतक का सबसे बड़ा घोटाला किया जा चुका है। सरकार अंग्रेजों की तर्ज पर बांटों और राज करो की नीति को बनाते हुए किसानों के विभिन्न संगठनों में साजिश के तहत फूट डलवा रही है जबकि हालात यह है कि देश की 60 फीसदी आबादी खेतीबाड़ी पर आश्रित है और कोरोनाकाल में प्रत्येक इंसान की थाली में किसानों का 100 फीसदी योगदान है। उन्होंने कहा कि आजादी के तत्काल बाद से ही देश की अर्थव्यवस्था में किसानों का योगदान 50 फीसदी से ज्यादा रहा है लेकिन किसानों की उपेक्षा सबसे अधिक रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक चौधरी निर्मल सिंह ने हमेशा ही किसानों के हकों की लड़ाई अग्रिम मोर्चे पर आकर लड़ी है। वर्तमान में कोरोना पॉजिटिव होने के कारण वे इस लड़ाई को उनके निर्देश पर लड़ रही है और किसानों के हक की लड़ाई में पूरी तरह से समर्पित हैं। चित्रा सरवारा ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान परिस्थितयों में किसानों को एकजुट होकर अपने हकों की लड़ाई लड़नी होगी और सरकार को मजबूर करना होगा कि लाए गए तीनों काले कानूनों को बिना शर्त वापिस लें ।

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