बहादुरगढ़ : आंदोलनरत किसानों के बीच बिताया दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नए साल का पहला दिन

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  • आंदोलनरत किसानों के बीच बिताया दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नए साल का पहला दिन
  • ट्रॉलियों में ज़रूरी सामान भरकर ख़ुद ट्रैक्टर चलाते हुए पहुंचे टीकरी बॉर्डर
  • किसान आंदोलन के चलते अपना जन्मदिन नहीं मनाने का लिया फ़ैसला
  • कहा- किसानों की सेवा में बिताएंगे 4 जनवरी का दिन, सभी शुभचिंतक भी करें उस दिन किसानों की सेवा और मदद
  • किसानों की सेवा ही मेरे लिए है सबसे बड़ा आशीर्वाद
  • टीकरी बॉर्डर पर बिजली सप्लाई में किसी तरह की कटौती ना करे प्रशासन

राजेन्द्र भारद्वाज। झज्जर


राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नए साल का पहला दिन किसानों की सेवा में बिताया। नववर्ष के मौक़े पर सांसद दीपेंद्र ट्रॉलियों में सामान लादकर ख़ुद ट्रैक्टर चलाते हुए टिकरी बॉर्डर पहुंचे और किसानों के बीच ज़रूरी सामान वितरित किया। इतना ही नहीं इस मौक़े पर दीपेंद्र हुड्डा ने ऐलान किया कि वो किसान आंदोलन के चलते इस बार 4 जनवरी को अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे। क्योंकि आज देश का अन्नदाता संघर्ष, पीड़ा और क़ुर्बानियों के दौर से गुज़र रहा है, ऐसे में किसी तरह का जश्न मनाना उचित नहीं है। इसलिए उन्होंने फ़ैसला लिया है कि वो 4 तारीख़ का पूरा दिन किसानों की सेवा में बिताएंगे। वो प्रदेश में जारी अलग-अलग धरनास्थलों पर पहुंचकर किसानों की सेवा करेंगे और उनका आशीर्वाद लेंगे। इस मौक़े पर दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने सभी साथियों और शुभचिंतकों से भी यही अपील की। उन्होंने कहा कि आप लोग हर जन्मदिन पर हज़ारों की तादाद में उन्हें बधाई और आशीर्वाद देने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार ऐसा करने की बजाय आप लोगों को किसानों के बीच पहुंचना चाहिए और उनकी हर संभव मदद और सेवा करनी चाहिए। यहीं तमाम लोगों की तरफ से उनके लिए जन्मदिन का आशीर्वाद होगा।

किसानों से बातचीत में सांसद दीपेंद्र को पता चला कि टीकरी बॉर्डर पर बार-बार प्रशासन की तरफ से बिजली की कटौती की जा रही है। इसके लिए दीपेंद्र ने सख्त लहजे में प्रशासन को चेतावनी दी कि वो किसानों को परेशान करने की कोशिश ना करे। बॉर्डर पर आए लाखों किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत पेश नहीं आनी चाहिए। अगर प्रशासन उन्हें परेशान करने की कोशिश करेगा तो हम इसका विरोध करेंगे। उल्लेखनीय है कि दीपेंद्र पहले भी कई बार टीकरी बॉर्डर पर किसानों से मिलने आए हैं। वो लगातार प्रदेश के अलग-अलग इलाक़ों में धरने पर बैठे किसानों के बीच भी पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े आंदोलन को जिस जज्बे, अनुशासन और शांति से किसान चला रहे हैं, वो निश्चित ही बधाई के पात्र हैं। उनके इस संघर्ष में हम उनके साथ खड़े हैं। सरकार को अब बिना देरी किए किसानों की मांगे माननी चाहिए और आंदोलन को समाप्त करवाना चाहिए।

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