फरीदाबाद : किसानों के संघर्ष का सम्मान करे सरकार, जल्द माने उनकी मांगें : हुड्डा

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  • वक्त के साथ लगातार बड़ा होता जा रहा है किसानों का आंदोलन, हर वर्ग किसानों के साथ : हुड्डा
  • गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रही है महंगाई की मार, लगातार बढ़ रहा है अमीर और गरीब के बीच का अंतर : हुड्डा
  • अविश्वास प्रस्ताव से जनता के सामने आएगी गठबंधन सरकार और विधायकों की सच्चाई : हुड्डा
  • सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए दिया है अभय चौटाला ने इस्तीफा : हुड्डा

राजेन्द्र भारद्वाज। फरीदाबाद


सरकार को किसानों के संघर्ष का सम्मान करना चाहिए। उनकी मांगे पूरी तरह जायज हैं, इसलिए सरकार को किसानों से बातचीत कर जल्द समाधान निकालना चाहिए। ये कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। हुड्डा आज फरीदाबाद में कई सामाजिक कार्यक्रमों शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को लगभग 3 महीने बीत चुके हैं। वक्त के साथ आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। देशभर के किसानों के साथ मजदूर, दुकानदार, कर्मचारी और छोटे व्यापारी का साथ भी किसानों को मिल रहा है। सरकार को भी जिद्द छोड़कर किसानों का साथ देना चाहिए और उनकी मांगे माननी चाहिए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि देश का हर वर्ग आज रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से त्रस्त है। पेट्रोल-डीजल के दाम सैंकड़ा छू रहे हैं। गैस सिलेंडर और खाने-पीने का सामान लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग बेहद मुश्किल से दौर से गुजर रहा है क्योंकि उसकी आमदनी तो घट रही है लेकिन महंगाई की वजह से खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। विशेष तौर पर पिछले 5-6 साल में गरीब और अमीर के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। अमीर और अमीर होता जा रहा है, गरीब और गरीब होता जा रहा है।अविश्वास प्रस्ताव पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी-जेजेपी सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। अविश्वास प्रस्ताव से सरकार के भीतर का सच जनता के सामने आ जाएगा और लोगों को पता चलेगा कि कौन-सी पार्टी और कौन-सा विधायक उसके साथ है और कौन आज भी सरकार के साथ खड़ा है। अभय चौटाला के इस्तीफे के सवाल का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि प्रदेश की जनता को पता है कि उन्होंने सिर्फ सरकार को मजबूती देने के लिए इस्तीफा दिया है। विपक्षी विधायक के तौर पर अपना फर्ज निभाने की बजाए उन्होंने इस्तीफा देकर उन्होंने जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भागने का काम किया है।

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