चंडीगढ़ : शहर नगर निगम के वार्ड 3 में मंडोर क्षेत्र का विधानसभा हलका अम्बाला कैंट

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  • इस प्रकार कैंट विधायक होते हैं नगर निगम के भी पदेन सदस्य
  • अगस्त, 2020 में नगर निगम वार्डबंडी फाइनल करते समय किसी ने क्यों नहीं की आपत्ति : हेमंत

राजेन्द्र भारद्वाज। चंडीगढ़


अम्बाला शहर नगर निगम के वार्ड 3 के अंतर्गत पड़ने वाले मंडोर क्षेत्र का विधानसभा हलका अंबाला शहर नहीं बल्कि अंबाला कैंट है। यह सुनने और पढ़ने में बेशक अजीब लगे परंतु सत्य यही है और संभवतः या तो इस ओर किसी का ध्यान ही नही गया अथवा किसी ने जानबूझकर इस मुद्दे को आज तक नहीं उठाया। लिखने योग्य है कि अम्बाला नगर निगम की इस बुधवार 24 फरवरी को प्रस्तावित बैठक में शामिल होने के लिए न केवल अम्बाला शहर विधायक असीम गोयल एवं अम्बाला लोक सभा सीट से सांसद रतन लाल कटारिया बल्कि अम्बाला कैंट विधायक अनिल विज को, जो प्रदेश के गृह, स्वास्थ्य, शहरी नगर निकाय आदि कुल सात विभागों के कैबिनेट मंत्री भी है, को भी बैठक में आमंत्रित करने संबंधी पत्र भेजा गया है हालांकि स्थानीय सासंद/विधायक अपने क्षेत्र की नगर निगम/निकाय की बैठकों में सामान्यतः शामिल नहीं होते हैं। इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के आधार पर बताया कि वर्तमान में वैसे तो अम्बाला कैंट के विधायक अम्बाला सदर नगर परिषद के पदेन सदस्य होते हैं परंतु चूंकि अंबाला शहर नगर निगम में पड़ने वाला उपरोक्त मंडोर क्षेत्र हालांकि कैंट विधानसभा हलके में पड़ता है, इसलिए इस वजह से स्वत: ही कैंट विधायक विज शहर नगर निगम के भी पदेन सदस्य बन जाते हैं क्योंकि अगर नगर निगम क्षेत्र का कुछ/थोड़ा सा भाग भी शहर विधानसभा हलके के अतिरिक्त किसी और विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है, तो हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 4 (3) के अंतर्गत उस हलके का विधायक भी शहर विधायक के साथ नगर निगम का पदेन सदस्य होगा। हेमंत ने बताया कि सर्वप्रथम 17 मार्च 2010 को तत्कालीन हुड्डा सरकार दौरान अंबाला शहर नगर परिषद और अंबाला सदर (कैंट) नगर परिषद को साथ जोड़कर और उसमें कुछ गाँवों को मिलाकर शहर और सदर क्षेत्रों का संयुक्त अंबाला नगर निगम गठित किया गया था जिसमें अन्य कुछ गांवों के साथ तत्कालीन मंडोर गाँव भी शामिल किया गया जहाँ उससे पूर्व हालांकि ग्राम पंचायत होती थी। 26 जुलाई 2019 को प्रदेश सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में तत्कालीन अम्बाला शहर और अम्बाला सदर(कैंट) क्षेत्रों की संयुक्त अम्बाला नगर निगम में से सदर जोन क्षेत्र को नगर निगम के दायरे से बाहर निकाल दिया गया एवं उसी दिन अम्बाला सदर क्षेत्र के लिए अलग से नगर परिषद घोषित (पुनर्गठित ) करने की प्रारंभिक नोटिफिकेशन जारी कर दी गयी एवं इसके कुछ सप्ताह पश्चात 11 सितम्बर 2019 को अम्बाला सदर नगर परिषद के गठन की विधिवत अधिसूचना भी जारी हो गयी हालांकि आज तक उसके पहले आम चुनाव नहीं करवाए गए हैं। हेमंत ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (आर) के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाले पूरे और कुछ लोकसभा/विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचित सांसद और विधायक नगर निगम के पदेन सदस्य होते हैं. इसी आधार पर सर्वप्रथम 24 जुलाई 2019 को शहरी निकाय विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में अम्बाला लोक सभा सीट से सांसद को अम्बाला नगर निगम का पदेन सदस्य नोटिफाई किया गया. 11 माह पूर्व 19 मार्च 2020 को विभाग द्वारा जारी एक और नोटिफिकेशन में न केवल अम्बाला शहर के विधायक बल्कि अम्बाला कैंट के विधायक का नाम भी अम्बाला नगर निगम के पदेन सदस्यों की सूची में नोटिफाई किया गया. हालांकि उसी दिन जारी एक अलग नोटिफिकेशन में अम्बाला कैंट विधायक का नाम अम्बाला सदर नगर परिषद के भी पदेन सदस्य के तौर पर नोटिफाई किया गया. इस प्रकार कैंट विधायक विज वर्तमान में अम्बाला नगर निगम और अम्बाला सदर नगर परिषद दोनों के पदेन सदस्य हैं। हालांकि जुलाई,2019 से पूर्व संयुक्त अम्बाला नगर निगम में अम्बाला शहर और अम्बाला सदर (कैंट ) दोनों विधानसभा क्षेत्र शामिल थे इसलिए शहर और कैंट दोनों के विधायक तत्कालीन नगर निगम के पदेन सदस्य होते थे और इस कारण मंडोर क्षेत्र बारे कोई गड़बड़ी नहीं थी जैसी अब हो गई है।हेमंत ने बताया कि भारतीय संसद के परिसीमन आयोग कानून, 2002 के अंतर्गत देश के सभी राज्यों के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया गया जिसकी फाइनल अधिसूचना वर्ष 2007-2008 में प्रकाशित की गईं जिसमें हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में अंबाला शहर कानूनगो सर्कल का पंजोखड़ा और मंडोर पटवार सर्कल शामिल किया गया था. अब चूंकि भारत के संविधान के 84 वें संशोधन के फलस्वरूप अब देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का अगला परिसीमन वर्ष 2026 के बाद की जनगणना अर्थात वर्ष 2031 के बाद ही होगा, इसलिए मंडोर क्षेत्र को अंबाला कैंट विधानसभा हलके से तब तक किसी भी हालत में अलग कर शहर विधानसभा क्षेत्र में नहीं डाला जा सकता है।  हालांकि हेमंत ने बताया कि छ: माह पूर्व अगस्त,2020 में जब अंबाला सदर जोन क्षेत्र अलग होने के बाद 12 नए गाँव शामिल कर पुर्नगठित की गई अंबाला नगर निगम की प्रारंभिक वार्डबंदी का प्रारुप तैयार कर, जिसमें मंडोर को शहर नगर निगम के वार्ड 3 मे डाला गया था, उसकी फाइनल नोटिफिकेशन जारी करने से पूर्व शहरवासियों की आपत्तियां और सुझाव माँगे गए, तो संभवतः किसी का भी इस ओर धयान ही नहीं गया अथवा किसी ने जानबूझकर यह मूद्दा नहीं उठाया. हालांकि हेमंत का यह भी मानना है अगर तब मंडोर को शहर नगर निगम में न शामिल किया जाता, तो अंबाला नगर निगम की जनसंख्या 3 लाख का आंकड़ा न पार कर पाती जो अंबाला नगर निगम का कानूनी अस्तित्व कायम रखने के लिए आवश्यक है।

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